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गुरु दसवां भाव में

Karma Bhavकर्म, प्रतिष्ठा, अधिकार

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गुरु दसवां भाव में

शुभ फल

जातक अत्यंत धनी, युद्ध, आचरणयुक्त, यशस्वी, विजयी, विद्वान, नीतिवान होता है। जातक प्रसिद्ध दयालु होता है। उसके धन से प्रतिदिन कई मनुष्यों को भोजन मिलता है। वह अतुल कीर्ति वाला होता है। उसका प्रताप अपने बाप-दादा से भी अधिक होता है। उसके घर में ऐश्वर्य व वाहन खड़े होते हैं। कई बार राज्य से भी मान, धन, वाहन, अधिकार मिलता है। उसे मित्र, पुत्र व स्त्री का सुख होता है। अक्सर हर कार्य में सफल रहता है। अध्यापन, लोहा, दस्तकारी के काम व आयात-निर्यात से धन लाभ होता है।

अशुभ फल

यदि गुरु या दशमेश आदि अशुभ प्रभाव में हो तो जातक दुष्ट कर्म करता है। उसे यात्रा आदि से लाभ नहीं होता। पिता से सुख, लाभ नहीं रहता। कई बार पिता अधिक देर जीवित नहीं रहता। परोपकार के या अन्य कारणों की वजह से जेल जाने तक की नौबत आ जाती है। पुत्र संतान भी अल्प होती है। जातक की यदि धर्म में रुचि हो, तो उसी अनुसार गरीबी बढ़ती जाती है। उसके देखे सपने अधूरे रह जाते हैं।

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