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गुरु सातवां भाव में

Yuvati Bhavविवाह, साझेदारी, व्यापार

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गुरु सातवां भाव में

शुभ फल

जातक कुशाग्र बुद्धि, कामदेव के समान सुंदर, सुरुचि, उदात्त, धैर्यशाली, नम्र और उत्तम वक्ता होता है। फोटोग्राफी, चित्रकला व शास्त्र आदि में रुचि होती है। वकालत संबंधी नौकरी उत्तम फल देती है। विचित्र प्रकार के कर्म करता रहता है। वह कुल में श्रेष्ठ होता है। श्रेष्ठ मंत्री बनता है। वैभवशाली समृद्ध जीवन बिताता है। राज्य में मेहनत से धन लाभ प्राप्त करता है। पत्नी भी सुंदर, गुणवती व पुत्रवती होती है। जातक को रति-सुख देने में कुशल होती है। जातक कभी-कभी स्त्रियों के प्रति अनासक्त रहता है। मित्र लोग इससे मिलकर प्रसन्न होते हैं। विरोधी इसके सामने दबे रहते हैं। वह गुणों में पिता की अपेक्षा श्रेष्ठ होता है। जातक राजा जनक की भांति संसार में रहकर भी निरासक्त जीवन व्यतीत करता है। धर्म-कर्म में आगे रहता है। विवाह के बाद भाग्योदय अधिक बढ़ता है। यात्राओं में कुशलता रहती है।

अशुभ फल

यदि गुरु अशुभ प्रभाव में हो तो जातक को अपने घर में कोई मान-सम्मान नहीं मिलता है। वह पिता व गुरुजनों से द्वेष करता है। पुत्रों की ओर से चिंता होती है। कई बार पुत्र होते ही नहीं। दत्तक पुत्र से भी सुख नहीं मिलता। यदि गुरु नीच राशि में हो, तो पत्नी की आयु के लिए अशुभ होता है। अपने से उच्च स्तर की स्त्री से अवैध संबंध रखता है। साधुओं की संगति से हानि होती है।

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