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केतु बारहवां भाव में

Vyaya Bhavव्यय, मोक्ष, विदेश

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केतु बारहवां भाव में

शुभ फल

जातक के नेत्र सुन्दर होते हैं। उत्तम शिक्षा ग्रहण करता है। राजा के समान सुख ऐश्वर्य भोगता है। युद्ध में, विवाद में, प्रतियोगिता में शत्रुओं तथा विरोधियों पर विजय प्राप्त करता है। शुभ कृत्यों में धन व्यय करता है। पुत्र जन्मने पर जातक की उन्नति होती है। यात्रा और घर में सुख मिलता है। यदि धार्मिक चित्त वाला हो तो जितेन्द्रिय होता है, अंत में मोक्ष प्राप्त करता है।

अशुभ फल

जातक अधम, निर्धन, विरोधी स्वभाव, व्यभिचारी, ऋणी होता है। यह गुप्त रूप से पाप कर्म करता है। इसके पाँव, आँखें, नाभि तथा गुप्तांग में कष्ट रहता है। मन में अशांति रहती है। मामा से इसे सुख नहीं मिलता।

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