stage
Jyotish Zone

शनि चौथा भाव में

Sukh Bhavमाता, घर, सुख

1234शं56789101112
शनि चौथा भाव में

शुभ फल

जातक गुणी, धनी, उदार, गंभीर, धैर्यवान, न्यायी, व्यसनहीन होता है। यह परोपकारी होता है। जातक विदेश यात्राओं के कारण अक्सर घर से बाहर रहता है। जातक नौकरी से धन लाभ कमाता है। व्यापार से उत्तम धन योग प्रायः नहीं बनते। अपना धन बड़ी-बड़ी संस्थाओं को बनाने में या चलाने में खर्च करता है। ऐसे जातक को शत्रुओं से भी लाभ सुख प्राप्त होता है। रोगादि में कड़वी दवाईयों से इसे लाभ होता है। यदि शनि उच्च का हो तो माता, वाहन, घर का सुख मिलता है तथा पैतृक सम्पत्ति भी मिलती है। जीवन के आखिरी दिनों में जातक एकांतप्रिय और संन्यासी हो जाता है।

अशुभ फल

जातक दुःखी, चिंतातुर, आलसी, झगड़ालू, दुराचारी, मलिन, सुखहीन, कपटी तथा दुष्टों की संगति करता है। इसे वात रोग, हृदय रोग होते हैं तथा शरीर से दुःखी रहता है। बचपन में रोगी रहता है। इसको जल में भय रहता है। ऐसे जातक को पैतृक, धन स्थावर, जंगम सम्पत्ति प्राप्त नहीं होती। भाई बन्धु और रिश्तेदारी में भी व्यर्थ का दोष लगता है। यह परेशानी माँ बाप के लिये भी संताप का कारण, अशुभ फल होता है। पशु तथा वाहन आदि में हानि है। घर बार छोड़ना पड़ता है। द्विभार्या योग बनता है। व्यभिचारी होते ही शनि और भी अशुभ फल पैदा करता है। यदि शनि वक्री हो तो स्त्री पुत्र और नौकरों का भी नाश होता है। जातक एक जगह से दूसरी जगह दर-दर भटकता है। स्वयं मकान आदि बनवाने से माता की सेहत बल्कि आयु तक नष्ट करता है।

संबंधित

अपनी कुंडली में देखें

यह आपके लिए कहाँ स्थित है, यह जानने के लिए अपनी निःशुल्क जन्म कुंडली बनाएं।

मेरी कुंडली बनाएं

दो कुंडलियों का मिलान? कुंडली मिलान आज़माएं