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सूर्य दसवां भाव में

Karma Bhavकर्म, प्रतिष्ठा, अधिकार

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सूर्य दसवां भाव में

शुभ फल

शारीरिक स्वास्थ्य उत्तम होता है। साहसी व दृढनिश्चयी होता है। उसकी गर्वीली प्रकृति होती है। किसी के सामने झुक नहीं सकता है। जातक अति की हद तक न्यायप्रिय होता है। शुभ कर्म करने की ओर उसकी बुद्धि रहती है। वह शास्त्रों का ज्ञाता होता है। पराक्रमी स्वभाव के कारण जातक राजा के समान अपनी स्थिति बना लेता है। राजकृपा व कीर्ति आदि प्राप्त कर लेता है। ऐश्वर्यशाली जीवन व बहुमूल्य वस्तुओं का स्वामी होता है। पिता का सुख होता है। वाहन सुख श्रेष्ठ रहता है।

अशुभ फल

जीवन के अंतिम भाग में रोगी होता है। जातक वहमी व आडंबरप्रिय होता है। अपने दोष या हानि को हर समय गाते फिरना उसके अनिष्ट की निशानी होती है। पुत्र संतान अक्सर थोड़े या होते ही नहीं। माता को भी कष्ट रहता है। पुत्र, मित्र, पत्नी आदि से वियोग होने के कारण उसका चित्त अशांति व ग्लानि से भरा होता है।

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