stage
Jyotish Zone

शनि दूसरा भाव में

Dhan Bhavधन, वाणी, परिवार

12शं3456789101112
शनि दूसरा भाव में

शुभ फल

जातक बहुत धनवान्, न्यायशील, धार्मिक, दयालु, सत्यवादी, मितव्ययी होता है। इसे बहुमूल्य वस्तुओं का संग्रह करने का शौंक होता है। ऐसा जातक विदेश गमन करता है तथा विदेश में इसे धन, मान, सर्व सुख प्राप्त होते हैं। परन्तु अपने देश में यह शनि धनदायक नहीं होता। पैतृक सम्पत्ति पाता है, स्वयं लकड़ी, लोहे से संबंधित व्यापार से धन लाभ होता है। राजकृपा से सम्मान अर्जित करता है। शत्रु इससे दबते हैं। दूसरे के विचारों को तेज़ी से पढ़ लेता है। धर्म-कर्म में तीव्र रुचि, संन्यासी हो जाता है और एकांतप्रिय मठाधीश बनता है।

अशुभ फल

जातक झूठा, ठग, निर्धन, गुणहीन, मुख, हड्डियों के तथा वात रोगों से पीड़ित रहता है। वह व्यसनी होता है। वह मित्रों से भी तोखे वचन बोलता है। अत: निजीजनों से व्यक्त चोरी करने में कुशल होता है तथा स्त्रियों को ठगता है। राज्य से दंडित होता है। जातक का धन उसके काम नहीं आता। ये लोग अपनी-अपनी पत्नी से विमुख रहते हैं। विवाह देरी से होता है। उसके विवाह के बाद उसके सुसराल में भी धन हानि की घटनाएँ होती है।

संबंधित

अपनी कुंडली में देखें

यह आपके लिए कहाँ स्थित है, यह जानने के लिए अपनी निःशुल्क जन्म कुंडली बनाएं।

मेरी कुंडली बनाएं

दो कुंडलियों का मिलान? कुंडली मिलान आज़माएं